उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के सात माह बाद इसमें बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी सरकार 19 अगस्त से गैरसैंण में शुरू होने वाले विधानसभा मॉनसून सत्र में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक 2025 पेश करने जा रही है। नए बदलावों में विवाह रजिस्ट्रेशन के नियम और दंड के प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
बीते जुलाई में ही सरकार ने अध्यादेश के जरिए जरूरी संशोधन लागू किए थे। रविवार को धामी कैबिनेट ने इस अध्यादेश को कानून की शक्ल देने के लिए संशोधन विधेयक को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दे दी।
क्या होंगे नए बदलाव
संशोधित विधेयक में अब 26 मार्च 2020 से लागू अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण की समय सीमा को छह माह से बढ़ाकर एक साल कर दिया गया है। इस समय सीमा के समाप्त होने के बाद दंड या जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
साथ ही अब सब-रजिस्ट्रार के यहां अपील, शुल्क आदि का निर्धारण भी किया गया है। लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है, जैसे दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का उल्लेख।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संशोधन से उन लोगों को राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश अब तक UCC के तहत विवाह पंजीकरण नहीं करा पाए थे। ये बदलाव राज्य में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को और सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।
लोकतंत्र सेनानियों की सुविधा को बनेगा कानून
देश में 50 साल पहले आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों को धामी सरकार कानूनी कवच देने जा रही है। ऐसे लोगों को अब तक शासनादेश के जरिए दी जा रही पेंशन सहित अन्य सुविधाओं को कानून की शक्ल देते हुए विधेयक 19 अगस्त से गैरसैंण में शुरू होने जा रहे मॉनसून सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा। इसमें 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल के दौरान एक महीने की जेल काटने वाले लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। लोकतंत्र सेनानियों को सरकारी स्वास्थ्य और परिवहन सेवाएं निशुल्क मिलेंगी।