दंत रोग से ईएनटी विभाग में रेफर हो रहे हर महीने चार से पांच गंभीर मरीज, चिकित्सक बोले- नाक के ऊपरी हिस्से की गल रही हड्डी
नाक में साइनस संक्रमण की बड़ी वजह दंत रोग बन रहा है। ऐसे में मरीजों के नाक के ऊपरी हिस्से की हड्डी गल रही है। इस तरह के मरीजों को ठंड के मौसम में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। दंत रोग विभाग की ओर से हर महीने चार से पांच गंभीर मरीजों को ईएनटी विभाग में रेफर किया जा रहा है।
दून अस्पताल के दंत रोग विभाग की ओपीडी में हर रोज करीब आठ मरीज ऐसे में पहुंच रहे हैं जो दांतों के गंभीर संक्रमण से जूझते हैं। इन मरीजों के चेहरे में सूजन और लालिमा की शिकायत देखने को मिलती है। जांच के बाद इनमें से कई मरीजों में साइनस संक्रमण की पुष्टि हो रही है। इन मरीजों के नाक के ऊपरी हिस्से की हड्डी गल रही है। इससे उन्हें नाक से सांस लेने में तकलीफ हो रही है। दून अस्पताल की दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश्वरी कृष्णन ने बताया कि आमतौर पर लोग दांत के संक्रमण को गंभीरता से नहीं लेते हैं। लंबे समय तक दांतों में संक्रमण रहने से वह नाक तक पहुंच जाता है। इसके बाद वह नाक के मैग्जिरेरी और फ्रंटल साइनस संक्रमण का बड़ा कारण बनता है। हर रोज ओपीडी में इस तरह के करीब आठ मरीज पहुंचते हैं, जो महीनों से दांतों के संक्रमण से जूझ रहे हों। ऐसे में मरीजों को जांच के बाद ईएनटी विभाग में रेफर किया जाता है। वहीं दून अस्पताल के ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन के मुताबिक इस तरह के मरीजों को ठंड के मौसम में सबसे परेशानी होती है। कई बार मरीजों के नाक की हड्डी की सर्जरी भी करनी पड़ती है। ऐसे में मरीजों को नाक बंद होना, नाक से पानी आना, चेहरे व सिर में दर्द और गंध महसूस न होने समेत कई तरह की मुश्किलें आती
दोनों विभागों के चिकित्सक करते हैं उपचार
इस तरह के मरीजों का उपचार दंत और ईएनटी विभाग के चिकित्सक मिलकर करते हैं। चिकित्सक के मुताबिक सर्जरी के दौरान दोनों विभागों के विशेषज्ञों का वहां पर मौजूद रहना अनिवार्य है।