देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की बैठक में राज्य आंदोलनकारियों ने प्रशासन और शासन की ओर से उनकी लंबित मांगों को अनदेखा किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने 14 दिसंबर को दीनदयाल पार्क में धरना देने का एलान किया। बैठक रविवार को शहीद स्मारक में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं को अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया है। अगर उनकी बातों को जल्द न सुना गया तो वे आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2021 में राज्य आंदोलनकारियों के द्वारा किए गए पत्र शासन और प्रशासन के पास अब तक पड़े हुए हैं, लेकिन चिह्नीकरण (recognition) के लंबित मामलों का निस्तारण नहीं किया गया है।
चिह्नीकरण के मामले में जल्द निर्णय लिया जाए- उर्मिला
बैठक में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सत्या पोखरियाल, उर्मिला शर्मा और पुष्पलता सिलमाणा ने भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं आज उम्र के आखिरी पड़ाव में हैं और चिह्नीकरण का इंतजार कर रही हैं, वहीं कई लोग इसी इंतजार में दिवंगत हो चुके हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि चिह्नीकरण के मामले में शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि आंदोलनकारियों को उनका हक मिल सके।
प्रदेश महासचिव रामलाल खंडूड़ी और प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने बताया कि बीते 30 जून को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई वार्ता में उन्होंने चिह्नीकरण के मामले का अंतिम निस्तारण करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब तक शासन की ओर से इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे राज्य आंदोलनकारी असंतुष्ट हैं।
इस अवसर पर पूरण सिंह लिंगवाल ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के स्वजन को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण से लाभ मिलने में खामियां हैं, और यदि जल्द ही इसे सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलनकारियों के परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा।
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
बैठक में कई प्रमुख लोग मौजूद रहे, जिनमें केशव उनियाल, गणेश डंगवाल, रामलाल खंडूड़ी, सत्या पोखरियाल, उर्मिला शर्मा, राधा तिवारी, राकेश अमोली, सुरेश नेगी, संतन सिंह रावत, विनोद असवाल आदि शामिल थे। सभी ने राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर एकजुट होकर आंदोलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्य आंदोलनकारी मंच ने यह स्पष्ट किया कि 14 दिसंबर को दीनदयाल पार्क में धरना दिया जाएगा और तब तक सरकार से उम्मीद की जाती है कि वे उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान दें।