देहरादून। Dehradun Car Accident: दून शहर शायद ही 11 नवंबर की वो काली रात कभी भूल पाएगा, जिसने छह घरों के ‘चिराग’ एक पल में बुझा दिए थे। ओएनजीसी चौक पर मध्य रात्रि दो बजे बेलगाम गति से दौड़ती कार और कंटेनर की भिड़ंत में जिस तरह दो युवाओं की कटी हुई गर्दन और शवों के चीथड़े इधर-उधर सड़क पर फैले हुए थे, उसने हर किसी को झकझोर दिया था।
इस भयावह दुर्घटना में युवाओं की बेलगाम गति से दौड़ती हुई कार तो एक कारण थी ही, लेकिन उससे भी बड़ा कारण पुलिस की रात्रि चेकिंग व्यवस्था ध्वस्त होना रहा। बेलगाम गति से शहर के बीचोंबीच पुलिस के पांच बैरियरों से गुजरते हुए कार 10 किमी दूर पहुंच गई, लेकिन कहीं भी कार को रोका नहीं गया। अगर पुलिस चेकिंग में यह कार रोक ली जाती, तो शायद यह हादसा ही न होता।
पुलिस ने तत्परता नहीं दिखाई
अब सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी की ओर से इस प्रकरण में शासन से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद यह माना जा रहा है कि न केवल इस दुर्घटना के असल ‘जिम्मेदार’ सरकारी तंत्र पर कार्रवाई हो सकेगी, बल्कि शायद सरकार ऐसे कदम भी उठाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस कार दुर्घटना के बाद शासन, जिला प्रशासन, पुलिस व परिवहन विभाग ने अपने स्तर पर अलग-अलग कदम उठाए, लेकिन जो छह युवा असमय काल का शिकार बने, उनके परिवार वाले शायद ही इस सदमे से कभी उबर पाएंगे
इसकी सबसे बड़ी वजह देर रात दून शहर में होने वाली पार्टियां और लांग-ड्राइव का जुनून है। पिछले कुछ माह में हुई दुर्घटनाओं की असल वजह भी यही रही। पुलिस-प्रशासन दुर्घटना के इन कारणों पर लगाम कसने में पूरी तरह विफल रहा, लेकिन गत 11 नवंबर की दुर्घटना के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर शहर के सभी बार रात्रि 11 बजे बंद करा दिए जा रहे।