उत्तराखंड
दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर से रैगिंग की घटना सामने आई है। इस बार एमबीबीएस नहीं बल्कि स्नातकोत्तर (पीजी) कर रहे सीनियर डॉक्टरों पर जूनियर के साथ रैगिंग का आरोप लगा है।
इस मामले में पीड़ित डॉक्टर ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.गीता जैन ने एंटी रैगिंग कमेटी को जांच सौंप दी है।
दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर से हुई रैगिंग की घटना ने छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रैगिंग से क्षुब्ध जूनियर पीजी डॉक्टर अपना दर्द बयां करते हुए भावुक हो गया। डॉक्टर बोला कि पिछले छह महीने से मानसिक पीड़ा झेल रहा हूं। अब तो पढ़ने का भी मन नहीं करता है।
साढ़े पांच वर्ष एमबीबीएस का कोर्स पूरा करने के बाद पीजी करने के लिए फरवरी में दून मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया था। शुरुआत में एक महीने तक सब कुछ सामान्य था लेकिन मार्च से सीनियर ने अलग-अलग बातों को लेकर नीचा दिखाना शुरू कर दिया। कई बार ऐसी घटनाएं हुईं जिसमें एमबीबीएस छात्रों के सामने ही सीनियर ने दुर्व्यवहार कर दिया। उन्हें अपने जूनियर छात्रों के सामने जाने में शर्म आती है
सोचता हूं कि उन्हें कक्षाओं में कैसे पढ़ाने जाऊंगा। पीड़ित डॉक्टर का कहना है कि शुरुआत में जब पढ़ाई में कमजोर था तो सभी दोस्त थे। कम अंक आते थे तो किसी को दिक्कत नहीं थी। लेकिन एक महीने बाद जब पढ़ाई में अच्छा करना शुरू कर दिया तो सभी रंजिश करने लगे। पीड़ित के मुताबिक उनके साथ हुई घटनाओं के बारे में उन्होंने एनाटॉमी की विभागाध्यक्ष से शिकायत की। लेकिन उन्होंने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। शिकायत के बावजूद सीनियर उन्हें बार-बार नीचा दिखाते रहे। इससे उनकी मां भी मानसिक रूप से परेशान हो रही है। उन्होंने घटनाओं के संबंध में अपने परिवार को भी जानकारी दी है।
इनसे क्या सीखेंगे एमबीबीएस के छात्र
मेडिकल कॉलेज में इस बार हुई रैगिंग की घटना इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि इसमें पीजी के सीनियर डॉक्टरों ने जूनियर के साथ रैगिंग की है। इन डॉक्टरों के ऊपर एमबीबीएस के छात्रों को पढ़ाने और क्लीनिकल कार्यों की बड़ी जिम्मेदारी होती है। आसान शब्दों में कहें तो ये कॉलेज में शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। अब जब शिक्षक ही रैगिंग की घटनाओं को अंजाम देंगे तो एमबीबीएस के छात्र इनसे क्या सीखेंगे। इससे व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठ रहा है।