अब सिर्फ स्टेशन नहीं, देहरादून का नया ‘गेटवे’ होगा हर्रावाला; लोकार्पण आज

देहरादून। पश्चिमी दून का हर्रावाला रेलवे स्टेशन अब सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं रहेगा, बल्कि शहर के विकास की नई पहचान बनेगा। वर्षों तक सीमित सुविधाओं और उपेक्षा झेलने वाला यह स्टेशन अब पूरी तरह आधुनिक रूप में तैयार

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हुए व्यापक कायाकल्प के बाद शुक्रवार को इसका लोकार्पण होगा। यह बदलाव केवल स्टेशन भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

महत्वपूर्ण पड़ाव

दून के तेजी से फैलते दायरे में हर्रावाला की अहमियत पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। डोईवाला, देहरादून एयरपोर्ट (जौलीग्रांट), हरिद्वार और ऋषिकेश की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्टेशन एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन चुका है।

आसपास नई कालोनियां बस रही हैं, संस्थान खुल रहे हैं और आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसके बावजूद स्टेशन वर्षों तक पुराने ढर्रे पर ही चलता रहा।

अब पहली बार यहां ऐसा बदलाव हुआ है, जो यात्रियों को बड़े शहरों के स्टेशनों जैसा अनुभव देगा। सबसे बड़ा बदलाव सोच में आया है। अब तक छोटे स्टेशनों को केवल ट्रेनों के ठहराव तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब उन्हें स्थानीय विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

हर्रावाला इसका ताजा उदाहरण है। नया स्टेशन न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि समीप के क्षेत्र में व्यापार, परिवहन और रोजगार की संभावनाओं को भी मजबूती देगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ स्टेशन

स्टेशन परिसर में प्रवेश करते ही नया भव्य पोर्च, चौड़ा सर्कुलेटिंग एरिया और आकर्षक भवन यात्रियों का स्वागत करेगा। वातानुकूलित प्रतीक्षालय, आधुनिक शौचालय, दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएं, रैंप, विशाल प्लेटफार्म शेल्टर, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और व्यवस्थित पार्किंग जैसी सुविधाएं स्टेशन की नई पहचान बनेंगी।

रेलवे का दावा है कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप पूरे कर लिए गए हैं। हर्रावाला स्टेशन का कायाकल्प उस समय पूरा हुआ है, जब उत्तराखंड में पर्यटन, धार्मिक यात्राओं व हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह स्टेशन आने वाले वर्षों में देहरादून के वैकल्पिक रेल प्रवेश द्वार की भूमिका निभा सकता है।

ट्रेनों का ठहराव बढ़ने से दून में कम होगा दबाव

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि हर्रावाला स्टेशन पर और अधिक ट्रेनों का ठहराव बढ़ता है तो देहरादून मुख्य स्टेशन पर यात्रियों का दबाव भी कम हो सकता है। इससे पश्चिमी देहरादून के हजारों यात्रियों को शहर के भीतर अनावश्यक आवाजाही से राहत मिलेगी।

स्टेशन के नए स्वरूप में स्थानीय पहचान को भी जगह दी गई है। भवन की डिजाइन आधुनिक होने के साथ क्षेत्रीय स्थापत्य की झलक भी देती है। इससे स्टेशन केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि देखने में भी आकर्षक बन गया है। लंबा प्लेटफार्म होने के कारण यहां 18 कोच की ट्रेनें भी आ सकती हैं, जबकि दून स्टेशन पर अधिकतम 16 कोच की ट्रेन आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *